Thursday, September 27, 2018

कसौटी ज़िन्दगी के


चाहत की कसौटिया कई है राहों में ,
पर इनका हल सही हमदर्द की बाहों में। 

ज़िंदगी के सफ़र में हौसले टूट जाते है ,
पर मुक़म्मल ज़िन्दगी का सच्चे हमदर्द के साथ पाते है। 

कभी कभी ऐसा होता है ये कसौटिया हमे बहुत कुछ सिखाती है ,
कौन सच्चा है कौन झूठा है ,
कौन अपना है कौन बेगाना है ,
इनकी पहचान हमें ये कराती है। 

जैसे बच्चो का अगली में जाने के लिए एग्जाम का होना जरुरी है ना 
वैसे ही ज़िन्दगी में आगे बढ़ने के लिए इन कसौटियों को पार करना नैसेसिरि है। 

ये हमे अगर कुछ देती है तो कुछ न कुछ लेती है ,
गम में अगर रुलाती है तो खुशियों में हँसाती है। 

वो ज़िन्दगी ज़िन्दगी नहीं जिसमे कसौटी न हो ,
वो राह राह नहीं जिसमे मंजिल की छह न हो। 

जिंदगी की इन कसौटियों को पार हमे करना है ,
श्रेष्ठ नहीं सर्वश्रेष्ठ बनकर आगे हमे बढ़ना है। 

इन कसौटियों का एन्ड तभी होगा ,
जब मन में हमारे हौसला बुलन्द होगा। 

तो अब से इन कसौटियों को कहो हैल्लो ,
और डरकर नहीं डटकर आगे बढ़लो।

Wednesday, September 26, 2018

श्री गणेश


नीलकंठ के हो तुम दुलारे ,
मैया पार्वती के प्यारे सितारे। 
कार्तिकेय के तुम हो भ्राता ,
रिद्धि -बुद्धि-सिद्धि के तुम हो ज्ञाता। 

शिव जी के तुम वंश हो ,
मैया पार्वती के अंश हो।
सुख दाता हो दुःख हर्ता ,
मांगलिक पर्व के तुम कर्ता हो। 

एकदन्त हो , लम्बोदर हो 
गौरिसुत हो ,लंबकर्ण हो। 
तुम हो महेश्वेर तुम हो प्रथमेश्वर ,
तुम हो धार्मिक तुम ही कवीश्वर। 

आमोद -प्रमोद के तुम प्रेमी ,
मूषक वाहन के तुम हो स्वामी। 
बुद्धि के तुम ईश्वर हो ,
तुम ही तो हमारे विघ्नेश्वर हो। 

मनोमय हो , मृत्युंजय हो ,
तुम तो हमारे रुद्रप्रिय हो। 
सुमुख स्वरुप सी तुम्हारी काया ,
भक्तों का तुम बनते साया। 

गणपति बाप्पा जय हो तुम्हारी ,
अगले बरस की शीघ्र करना तैयारी। 

पहला प्यार


वो  रात बारिश वाली थी ,
जब  कायनात ने हमे मिलाने की साज़िश रची थी। 

जैसे बारिश की बूंदों का एहसास कुछ खास होता है ना 
वैसे ही पहली नज़र का प्यार होता है। 
कुछ अलग कुछ जुदा,
जस्ट लाइक रोटी विथ नुटेला। 

मैं सामान खरीद रहा था और बारिश को कोस रहा था,
मगर वो बारिश की बूंदों से खेल रही थी,
उन्हें छू रही थी छप - छप कर रही थी। 

मेरी नज़रे उस पर पड़ी ,
साँसे मेरी एकदम से रुकी। 
वो गीले गीले बाल और उसकी पलकों का झपकना ,
फिर मेरे दिल की धड़कनो का तेज तेज चलना। 

ये पहली नज़र का पहला प्यार था ,
जिसका खुमार कुछ अलग ही था। 

जो बारिश पसंद न थी 
वो अब अच्छी लगने लगी। 
दीवाने की दीवानगी 
अब और बढ़ने लगी। 

बारिश प्यार का सिम्बल है ये तो पता था ,
पर ये हकीकत में होगा ये नहीं जनता था।
ये फीलिंग्स डेट आई कैंट एक्सप्रेस ,
इट फील्स ग्रेट व्हेन यू फाइंड योर प्रिंसेस। 

लेकिन वो एज यूजवल मेरी न थी ,
हर लव स्टोरी हैप्पी हो ऐसा कहीं लिखा नहीं।
हर लव स्टोरी पूरी हो कांट से ,
पर हर लव स्टोरी में चाहत बेशुमार हो वी कैन से। 

याद रहेगी मुझे आँखे वो जुल्फे ,
उसकी वो छप छप और वो बारिश वाले नगमे। 

हर इंसान के साथ एक बार ऐसा होता है ,
जब लव एट फर्स्ट साईट का रंग उस पर चढ़ता है। 
ये रंग बहुत ही खास है 
क्यूँकि ये पहले प्यार का पहला एहसास हैं।

Tuesday, September 4, 2018

अधूरी कहानी भाग - 2 Adhuri Kahani Part - 2



वो शादी की रात थी जब हम ह में पहली बार मिले थे ,
मेरे हाथ में रुमाल था और उसके कपड़े ज़रा गीले थे। 
बस रुमाल ने हमे मिलाया था ,
जिस पर उसकी निशानी को मैंने पाया था। 
इतनी हड़बड़ी में हुआ था ये सब ,
पता नहीं चला समय बीत गया कब। 

एंजेल प्रिया , प्रिंसेस बेबी फेसबुक पर बहुत है ,
पर मेरी जो प्रिंसेस है वो यहाँ से गायब है। 

भला हो उस शादी का जहाँ अपन फिर मिले ,
लाल ड्रेस तुम्हारी थी और और फेस पर मेरे ख़ुशहाली थी। 

सोचा तुमसे बाते करू 
अपने जज़्बातों को बयाँ करू। 
तुम्हारी स्माइल को देखूँ ,
और दिल में तुम्हारी छवि बनाऊँ। 

आने वाला था मैं तुम्हारे पास ,
पता चला तुम हो किसी और के पास। 
मिस नहीं तुम मिसेस हो ,
मेरी नहीं किसी और की प्रिंसेस हो। 

चेहरे पर तुम्हारे लाली थी मांग में सिन्दूर था ,
पर दिल में न जाने क्यों तुम्हारा ही फितूर था। 

समझाया मन को मैंने मेरे ,
दिल में कोई और है तेरे। 

एक तरफ़ा चाहत थी तू मेरी ,
जिसमे आशिकी थी आधी -अधूरी। 

जिसे चाहा था पहली दफ़ा ,
जिसे माँगा था रब से सदा। 
अब उसे भूलना होगा ,
कहानी का यहाँ दी एन्ड करना होगा। 

एक तरफ़ा मौहब्बत मेरी थी ,
लेकिन मेरे दिल की मंज़ूरी पूरी थी। 

ये एहसास बहुत ही अज़ीब है ,
एक तरफ़ा चाहत का अपना ही नसीब है। 

तू खुश रहना उसके लिए ,
मैं खुश हूँ तेरे लिए। 
कुछ न कहूँगा अब तुझे ,
मानेगा तो अब रब मुझे। 

सात जन्मों का है तेरा उसका नाता ,
मगर आठवें जन्म का रब ने किया मुझसे वादा। 
आठवें जन्म में अपन मिलेंगे ,
कहानी का नया अध्याय लिखेंगे।

अधूरी कहानी Adhuri Kahani


कहते है भगवान ने हर किसी के लिए किसी को बनाया है ,
शायद इसी कारण उसने हमे उस दिन मंदिर में मिलाया है। 

टूरिस्ट तुम थी पर गाइड मैं था ,
क्वेश्चन तुम्हारा था पर फर्स्ट क्रश मेरा था। 

आजकल फेसबुक का बड़ा सहारा है ,
कई प्रेम कहानियों की कश्ती का ये किनारा है। 

स्लोली -स्लोली चुपके -चुपके चैटिंग होना शुरू हुई ,
टूरिस्ट-गाइड से क्लोज फ्रेंड बनने की कहानी बुनना शुरू हुई। 

रिश्ता ऐसा बढ़ता गया ,
शादी का सपना संजोया गया। 

लेकिन वो लव स्टोरी का जिसमे ट्रायंगल न हो ,
और वो परिवार क्या जिसमे दीदी का देवर न हो। 

घरवालों ने जब दीवाने देवर से रिश्ता तुम्हारा तय किया ,
मेरे दिल की धड़कनों ने धड़कना ने ज़रा कम किया। 

भगवान् को भी शायद ज़रा तरस आया होगा ,
इसी कारण उसने दीवाने देवर का पर्दाफ़ाश करा होगा। 

रिश्ता टूटा जल्दी से ,
उम्मीदे बड़ी फुर्ती से। 

मगर भगवान् ने कुछ और ही चाहा था ,
इसी कारण उसे बीच राह में बुलाया था। 

कैसा तू निष्ठुर है  ?
प्रेम कहानी का दुश्मन है । 
जिस अग्नि के साथ फेरे लेना हम चाहते थे ,
उसी अग्नि से तूने उसे जिन्दा  जिन्दा जलाया था।    

वो चली गई बस चली गई ,
अकेले मुझे इस दुनिया में छोड़ गई। 

बस उसकी वो बाते है और वो मुलाकातें है ,
कुछ पुरानी निशानियाँ  और वो हसीन राते है। 

अगले जन्म में फिर मिलेंगे ,
प्यार की नई कहानी बुनेगें। 

दुनियाँवाले देखते रह जायेंगे ,
ये दिलवाले तो अपनी दुल्हनिया ले जायेंगे।

Tuesday, August 21, 2018

क्या ये मेरी कल्पना है ..... ?


आँखे बंद करने पर एहसास तुम्हारा होता है ,
धूप में आगे चलने पर साया तुम्हारा दिखता है। 
क्या ये मेरी कल्पना है .. या मेरा पागलपन 

बारिश न हो फिर भी भीगा सा महसूस करता हूँ ,
तेरे चेहरे के नूर को हर तरफ़ में देखा करता हूँ। 
क्या ये मेरी कल्पना है .. या मेरा पागलपन 

अकेले बैठा - बैठा खुद से बाते करता हूँ ,
ख्यालों में तेरे अक्सर मैं खोया रहता हूँ। 
हर चेहरे में सिर्फ़ तू ही नज़र आती है ,
हर रास्ते की मंजिल तू ही मुझे लगती है। 
क्या ये मेरी कल्पना है .. या मेरा पागलपन 

अकेले सफर में साथ तेरा लगता है ,
दिल मेरा आजकल ज़रा तेज धड़कता है। 
साँसे मेरी न जाने क्यों कभी - कभी थम सी जाती है ,
कानों में मेरे तेरी वो मीठी आवाज़ सुनाई देती है।
 क्या ये मेरी कल्पना है .. या मेरा पागलपन

 अगर ये कल्पना है तो इसे कल्पना ही रहने दो ,
  तुम न सही तुम्हारी यादों को ही रहने दो।

Thursday, August 16, 2018

उपहार... प्रकृति के { Nature's Gift }

                                                            प्रकृति ने दिए उपहार कई ,                                        
न करें हम मुश्किल नई।
Gifts nature offers,
  Not to make a problem new . 
 
बारिश की बौछार ,
ख़ुशी का ख़ुमार। 
ओस की बूँद ,
आँखे कर लो मूँद। 
स्पर्श करके इस एहसास को ,
बुझा लो अपनी प्यास को।
Rain Shower ,
Happy drunkenness. 
  A drop of dew ,
 Feet it a few . 
This feeling by touching,
Take off your thirst.

शेर की दहाड़ ,
झरने वाले पहाड़। 
नदियों का पानी ,
मछली की कहानी।
लहरों का आगमन ,
चिंताओं का निर्गमन।
Lion's roar,
Mountain with waterfalls. 
Rivers of water,
Telling Fish story.
Waves of arrival,
Exodus concerns. 

पेड़ों की छाँव ,
पड़े हमारे पाँव। 
ठण्डी वायु , शीतल कण 
तन में उमंग पाए मन। 
चलती धरती , चलता आकाश 
उगता सूरज , चँदा महान।
. The shade of trees,
Have our feet. 
Cold air, soft particles 
Pegasus could feel body . 
Moving earth, shows the sky 
The sun rises and birds fly . .

हरे - भरे मैदान , बर्फ़ की खान 
स्पर्श कर , करें जीवन महान।  
 आग गर्म है   
 जीवन मर्म है। 
प्रकृति के इन उपहारों का न करें उपहास ,
इनके कारण ही है जीवन आस - पास।
Green - lush grounds, Snow mines ,
Touch, and make great life.  
    Fire is hot   
     Life's secret got . 
Do not these gifts of nature ridicule,
Their cause life is around us .

Monday, August 13, 2018

स्वतंत्रता सेनानी (freedom fighters)

जय हो मेरे स्वतंत्रता सेनानी ,
याद रहेगी सदा आप सब की कहानी। 

आप सब आये थे ,
कुछ न कुछ लाये थे। 

मंगल पांडे आये थे , क्रांति को लाये थे। 
रानी झाँसी आयी थी , वीरांगनाओ को लायी थी। 

भगतसिंह आये थे , वीरता को लाये थे। 
गाँधी बाबा आये थे ,सत्याग्रह को लाये थे। 

सुभाष जी आये थे , हिन्द फ़ौज लाये थे। 
पटेल मोहदय आये थे , एक राजस्थान लाये थे। 

बाबा साहब आये थे , सविंधान को लाये थे। 
तिलक जी आये थे , स्वराज को लाये थे। 

आप सब ने इस धरा को पावन बहुत किया है ,
आप के कारण ही हम सबने जीवन को जिया है। 

 गुलाम रहते , मज़बूर होते 
आप सब यदि एक साथ न होते। 

आप सब ने बढ़ाया भारत की शान को ,
अब हम बनाएंगे भारत की नई पहचान को। 

जय हिन्द। 

Friday, August 10, 2018

प्यार की ये एक..... कहानी

एक था लड़का एक थी लड़की ,
दोनों मिले जब बिजली कड़की। 

बिजली ने दोनों को मिलाया ,
हवा में फिर प्यार छाया। 
अनजानी राहों से जानी राहों तक,
सफर उन्होंने एक निभाया। 

शुरू - शुरू में मिलते थे ,
दोनों मिलकर झगड़ते थे। 
 धीरे - धीरे मुलाकाते हुई,
प्यार की बारिश की बौछारें हुई।

नफरत से जो शुरू हुआ था रिश्ता ये उनका ,
अब प्यार की कसौटी पर खरा है उतरा। 

प्रेम ऐसा ही भाव है ,
जिसका नदी समान बहाव है। 
प्यार की नज़रों में सब समान है ,
प्यार में पागल सब महान है। 

लैला - मजनूं  , सोनी - महिवाल प्यार में दीवाने थे ,
ढोला - मारु , हीर - राँझा इनके भी फसाने थे। 

लड़के ने आगे बात बढ़ाई। 
आँखों को उसकी आँखों से मिलायी। 

लड़का बोला फिर लड़की से ,
बात तू सुनना अब ढंग से। 

प्यार की गलियों में तुझे पाया है ,
धड़कन में मेरी मैंने तुझे बसाया है। 

सांसो में मेरी तेरा नाम लिखा है ,
किस्मत को मेरी तेरे नाम किया है। 

रब से है बस यही फ़रियाद ,
पोते - पोती की शादी तक रहे अपना साथ।

Wednesday, August 8, 2018

यादें

जीवन के वो पल कहाँ गए ,
जो खो गए किसी दरिया में। 
ये बेहतरीन लम्हें ज़िन्दगी के ,
चले गए किसी नई दुनिया में। 

इन पलों में आँसु थे ,
इन पलों में मोती।
इन पलों में ख़ुशियाँ थी ,
जीवन की एक ज्योति। 

बन गए ये क्षण भूले - बिसरे ,
जो जीवन से पुरे खिसके। 
इन लम्हों को याद करुँ ,
इनकी कमी में उदास रहूँ। 

बचपन की वो यादें जब भी याद करुँ ,
आँखों में नमी दिल में फ़रियाद करुँ। 
इधर - उधर जाना, कुछ न कुछ करना ,
जब चाहे जहाँ , वहाँ हो जाए रवाना। 

किसी का प्यार, किसी की तकरार 
किसी का झगड़ा घर पर पंगा। 
बड़े हुए सब भूल गए ,
अकेले दुनिया मे रह गए। 

याद आते है मुझे वो हसीन लम्हें ,
जिनसे जुड़े मेरे जीवन के पन्नें। 
वो लोग , वो पल , वो बातें 
जो मुझे अब भी याद आते। 

यादें बड़ी निर्दयी है ,
सबको बहुत रुलाती है। 
एक आद ज़रूर हँसाती है ,
वरना बाकी सब रुसवाती है। 

आगे से कुछ ऐसा हो जाए ,
ये मेरी क़ैदी बन जाए। 
रहे मेरे पास वे पल ,
जो बीत गए पुराने कल।

Saturday, August 4, 2018

यारियाँ

दुनिया में भगवान ने रिश्ते कई बनाये है ,
कुछ रिश्ते हमने भी दिल से निभाए है। 

दोस्ती का रिश्ता ऐसा ही कुछ खास है ,
इस रिश्ते के कारण ही जीवन हमारे पास है। 

ये रिश्ता स्कूल से उम्रभर तक चलता है ,
जन्म से लेकर मरण तक साथ हमारे रहता है। 

दुःख में हाथ , सुख में साथ यार हमारे निभाते है ,
जीवन की हर डगर में सदा ये मुस्कुराते है। 

यार से प्यारा कोई नहीं ,
यार जैसा सहारा कहीं नहीं। 

रब से है बस यही दुआ ,
यारियों से दूर रहे सारी बला। 

एक-एक यार को मेरी दुआएँ ,
जीवन में तुम्हारे खुशहाली छाए। 

बस इतना सा ही ध्यान रखना ,
मुझे सदा ही याद करना।

Thursday, August 2, 2018

भ्रष्टाचार


भ्रष्टाचार एक ऐसी बीमारी ,
घेर ली है  जिसने दुनिया सारी। 

 भ्रष्टाचार करने वाला है भ्रष्टाचारी ,
तो भ्रष्ट आचरण सहने वाला भी है भ्रष्टाचारी। 

 भ्रष्टाचार की एक ऐसी कहानी ,
आज सुनाऊँ मैं अपनी जुबानी। 

एक आदमी ऐसा था जिसके जीवन में सब कुछ था ,
नाम , शौहरत सब था जिसे वह चाहता था। 

मगर लोभ ने ऐसी लात मारी ,
जिंदगी हो गयी अनजानी सी सारी। 

एक दिन की बात है, कर रहा था वह सरकारी काम ,
आयी एक सूचना ऐसी जिसमे था मुश्किल का नाम। 

मुश्किल को दूर करने के लिए माँगी उसने घूस ,
पकड़ा गया घूस लेते, पड़े उसके लाते -भूस। 

गया पद से , गया नाम से ,
काम किया ऐसा अज़ब सी शान से। 

लोभ है एक ऐसी बला ,
जिससे नहीं होता किसी का भला। 

मत करो लालच , मत करो लोभ ,
जितना है उसमे रहो , रखो ऐसी सोच। 

ले हम सब प्रण ऐसा ,
न करे भ्रष्टाचार उसके जैसा। 

जीवन में एक बात न भूलना ,
थोड़ा है बस थोड़े की ज़रुरत में ही रहना।

Monday, July 30, 2018

नारी-शक्ति

एक सुन्दर ,सलोनी प्यारी सी 
लड़की की ये कहानी है। 
जिसकी शादी थी दो दिन में
बदली उसकी जिन्दगानी है। 

जा रही थी वह बाज़ार कुछ अँधियारी गलियों से
पीछे से कुछ इंसान आये शैतानों के मुखौटे में। 

पकड़ लिया उसको सबने 
जैसे कोइ खिलौना हो। 
दबोच लिए ऐसे सबने
जैसे कोई टुकड़ा हो। 

चिल्लाती रही, वह दुबकती रही
शैतानों के आगे गिड़गिड़ाती रही। 

नहीं सुनी किसी ने उसकी
अस्मत लूटली सबने जिसकी। 
उनकी हरक़त नापाक़ थी 
लड़की बेचारी बदहवास थी। 

मरा समझ के छोड़ गए वे जिस नारी को 
क्या पता था उन्हें पड़ेगी उन पर भारी वो। 

लड़की ने होश सम्भाला 
अंदर की दुर्गा को जगा डाला। 
दुर्गा की भाँति ही उसने 
महिषासुरों का वध कर डाला। 

नारी को तुम कम न समझना 
नारी गुण की खान है। 
नारी बिना जीवन में 
न राग है ना ज्ञान है।

Sunday, July 29, 2018

सपना बाबुल का....... बिदाई

एक किलकारी गूँजी है ,
डॉक्टर बोला बेटी है। 
बाबा ख़ुश माँ भी खुश ,
बेटी लायी पूरा सुःख। 

सालभर की हो गई लाड़ली,
माँ-बाप की प्यारी बावली। 
चलना सिखाया खूब खिलाया ,
रोइ ख़ूब तो शोर मचाया। 

समय बीता तेजी से ,
पौधा बड़ा जल्दी से। 
माँ -बाप को चिंता है ,
बेटी का ब्याह करवाना है। 

रिश्ते आये खूब आए  ,
कभी पसंद आये तो कभी नी आए। 
एक रिश्ता आया है ,
जो सभी को भाया है। 

बात हो गयी पक्की ,
रिश्ता होगा पूरा जल्दी। 
पंडित आया पैगाम लाया ,
ब्याह कब होगा यह बताया। 

हुई तैयारिया मची धूम ,
बुलावा भेजा सबको ख़ूब। 

ब्याह हुआ अच्छे से ,
पूरे हुए अरमां अपने से। 
रोना आया माँ-बाप को।,
बेटी बोली याद रखना मुझको। 

रखा जिसे पलकों की छाँव में ,
चली बिटिया नए राह में। 
बाबुल का अँगना छूट गया ,
माँ का पल्लू रह गया। 

बेटी बोली बाबुल से ,
रखना ख्याल अच्छे से। 
बाबुल बोला बेटी से ,
मेरा अँगना छोड़ दिया तूने। 

चली छोड़ तू मेरा अँगना ,
बनाना नए घर को अपना। 
माइके को याद न करना ,
ससुराल में नाम कमाना। 

तेरी लाज से मेरी लाज है ,
तुझ पर मेरा जीवन कुर्बान है।


Saturday, July 28, 2018

सावन

आया सावन आया सावन ,
दिल लुभाने आया सावन ,
गीले मोती को लाने वाला ,
आया ऐसा सावन मतवाला।

सावन तुम बड़े खास हो ,
किसानो की तुम आस हो ,
मिट्टी की प्यास बुझाने वाला ,
आया ऐसा सावन मतवाला।

देखो-देखो नाचे मोर,
सावन में चारों ओर ,
हरियाली तीज को लाने वाला ,
आया ऐसा सावन मतवाला।

सूखे बागानों में रौनक आ गयी ,
पंछियो की चहचाहट फिर छा गयी ,
वनों को जान देने वाला ,
आया ऐसा सावन मतवाला। 

नदियाँ फिर से भर जाएगी ,
जमीनें फिर से खिल जाएगी ,
पहाड़ों का शृंगार करने वाला ,
आया ऐसा सावन मतवाला। 

आया सावन आया सावन ,
दिल लुभाने आया सावन।

Thursday, July 26, 2018

प्रभु-भक्ति


प्रभु भक्ति में मन लगा है ,
दिल मेरा ईश्वर से जुड़ा है।

   तुम हो खुदा तुम हो कृपालु ,
तुम हो नानक तुम ही दयालु।

दीप ज्योत जलाकर और छोडकर सारे काम ,
ले रहा हूँ भक्ति में भगवन मेरे आपका नाम।
प्रस्तुत है मेरे भाव आपके समक्ष में ,
भक्त हूँ मैं आपका कहता हूँ इस उपलक्ष में।

मन मोहे राम बसे ,
मन तुझमें लगाऊँ कैसे 
दिल मोहे गोपाल बसे ,
दिल तुझसे मिलाऊँ कैसे।

नैनो में मेरे महावीर बसे ,
नैनो को तुझसे जोड़ूँ कैसे 
कानों में मेरे बुद्धा बसे 
ध्वनि तेरी मैं सुनू कैसे। 

सपनों में मेरे ख़ुदा बसे ,
सपनें तेरे मैं देखू कैसे 
आवाज़ में मेरे नानक बसे 
आवाज़ तुझे मैं दूँ कैसे। 

ध्यान में मेरे जीजस बसे ,
ध्यान तुझ पर लगाऊँ कैसे 
आत्मा में मेरे शिव बसे 
आत्मा को तुझसे मिलाऊँ  कैसे।
                                                      अभ्युत्कर्ष 

Tuesday, July 24, 2018

क्या होगा .....



आज की शाम में क्या होगा.... 

जली हुई काया क्या ठीक होगी या 
मन में लगी आग शांत होगी ,
चाँद की चांदनी नसीब होगी या 
तारों की जगमगाहट मिलेगी ,
जुगनुओं की बारिश होगी या 
टूटे तारें से मुलाक़ात होगी।  
आज की शाम में क्या होगा.... 

दिल बेताब है जानने को ,
आख़िर क्या होगा इस शाम को 
आत्मा को मिलेगी शांति या 
दिल को मिलेगी कोई कान्ति।

आज की शाम में क्या होगा.... 


Monday, July 23, 2018

कुछ नया ....

आज मैंने कुछ नया देखा है ....

पत्तियों को हवा के साथ लहराता देखा है ,
चिड़ियों की चहचाहट और पतंगों को उड़ते देखा है ,
हवा में मिट्टी को बहते देखा है ,
बच्चों का दादी से प्यार देखा है।

आज मैंने कुछ नया सीखा है ....

पत्तो का हवा से वात्सल्य सीखा है ,
चिड़ियों की चहचाहट में राग को सीखा है ,
मिट्टी की अस्थिरता को सीखा है ,
दादी -पोते के प्यार को सीखा है।

खाने के लिए उछलता-कूदता देखा है ,
लोगो की हँसी को महसूस करना सीखा है,
नए चरण में उतरते देखा है ,
नया बनने की कोशिश करना सीखा है।

 आज मैंने कुछ नया देखा है ,
 आज मैंने कुछ नया सीखा है। 
 
 चीटियों को गिरते -चढ़ते देखा है ,
 चीटियों से मेहनत करना सीखा है।
 किसी को दुःख में दुःखी  देखा है 
 तो किसी के दुःख को बाँटना सीखा है। 
 नया बदलाव होते हुए देखा है ,
 जीवन में बदलाव करना सीखा है। 

आज मैंने कुछ नया देखा है ,
आज मैंने कुछ नया सीखा है।

 

 
 
 

Sunday, July 22, 2018

आँसु

ख़ुशी आए या गम छाए
आँसु हम हर पल बहाए 
 है हमारा जन्मसिद्ध अधिकार 
आँसु बहाए हम हर बार 

दुःखो की बहार आँसुओ के साथ 
सुखों के द्वार आँसुओ के हाथ 
बने माँ -बाप तब आँसु 
मरे माँ -बाप तब भी आँसु 

रिश्ते जुड़े तब आँसु 
रिश्ते टूटे तब भी आँसु 
आँसु आँसु कितने आँसु 
इधर आँसु उधर आंसू 
क्या सदाबहार है ये आँसु ?

जीना है तब आँसु 
मरना है तब भी आँसु 
ख़ुशी के आँसु , दुःख के आँसु
कितने प्रकार के है यह आँसु  

आँसु जीवन का है एक अंग 
जब हो भंग , तब चढ़ेरंग 
एक-एक लाख का है  एक मोती 
जीवन की एक अदृश्य ज्योति

Saturday, July 21, 2018

मेरा बचपन

                                                                          मेरा बचपन था कुछ ऐसा 
                                                                          जो चला गया एकदम सहसा 
                                                                          
                                                                           सुबह -सुबह मम्मी का उठाना 
                                                                            फिर दीदी के साथ  स्कूल जाना 
 
                                                                            एक दिन टिफ़िन उसका एक दिन मेरा 
                                                                            उठाते हम हर सवेरा 
          
                                                                            बीच की छुट्टि का होना 
                                                                             हम सब का बाहर खेलना 
                       
                                                                             कक्षा में मंदिर का बिठाना 
                                                                              सब के साथ पूजा  करना   

                                                                            स्कूल के बाद घर पर आना 
                                                                            पूर्वी ,छोटू के साथ खेलना 

                                                                             ऊंची -नीची , बर्फ़ -पानी 
                                                                             जिनका नहीं कोई सानी 

                                                                            घर बदला , जगह बदली 
                                                                             गली बदली , जिंदगी बदली 

                                                                            अकेले हुए मन न लगा 
                                                                             टीवी देख मन लगा 

                                                                            बचपन तो ख़त्म हो गया 
                                                                             पर बहुत यादें दे गया 

                                                                             बचपन तू फिर से आजा 
                                                                              जल्दी से मुझमें समाजा

Friday, July 20, 2018

कौन हैं वो ..

                    
                             मेरा मन किसी को बुला रहा है
                            कौन  है वो  ..... ?
                            क्या कोई अनजानी राह  है
                            या फिर कहीं  दिल की चाह है।
                            कौन है वो ...   ?
 
                            बारिश की बूँद है या
                            सूरज की रोशनी है
                            चाँद की चाँदनी है या
                            वनों की हरियाली  है
                             कौन है वो  .... ?
                  
                            पहाड़ की ऊँचाई है या
                            सागर की गहराई  है
                            किसी अनजाने की दस्तक है या
                            मेरे पैरो का कत्थक  है
                            कौन है  वो  .... ?

                            हवा का तेज बहाव है या
                           नदियों का शांत स्वभाव है
                           ठण्ड की शीतलता है या
                           गर्मी की उष्णता है 
                           आखिर  कौन हे वो ... ?                     

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